प्रदेस नं २ के विकासके जीवन आधार

प्रदेस नं २ के सरकारके भारी मतसे विश्वासके मत मिललाके वाद अव जनता सव सरकारके विकास कार्यक्रमके प्रतिरक्षारत वाणन । सरकारके कार्यक्रममे वहुत सारा सवालके सम्वोधन कहिल जरुरी वा । अगर सरकार सही तरीकासे प्राथामिकता करे सकी त वहुते छोट समयमे वहुत ज्यादा विकासके कार्य कर सकी अगर विना प्राथामिकता पहिचान कहिल नीति तथा कार्यक्रमके निर्धारण होइ त प्रदेसके विकास नाहोइ यी मे कौनो शंका कइल जरुरी नैखे । नीति तथा कार्यक्रम वहुत सोच समझके वैज्ञानीक दृष्टिकोणके आधारमे वनावेके चाही ।

प्रदेसके भाग्य और भविष्यके भाग्यरेखा वनावेके जौन मौका मिललवा वोकराके सही हिसाव से सदुपयोग कइल जरुरी वा । माननीय मुख्य मन्त्री श्री लालवावु जीऔर उनकर मन्त्री मण्डलके इतिहास रचेको मौका मिललवाटे । यी ऐतिहासीक अवसरके सदुपयोग रणनीतिक हिसावसे कइल जरुरी वा नकी दलिय भागवण्डाके आधारमे । कौने प्रदेसको विकासके आधार वहाँके जनशक्ति एक नम्वरमे आवेला । जव दक्ष जनशक्ति होइ तवे उत्पादनके साधन और श्रोतके सहिसदुपयोग होइ और उत्पादन वढे सकी । सारा उत्पादनके श्रोत जमिन ह । जमिनमे उत्पादकत्व वढाके खातिर जव सव जनता सक्षम होइ तव प्रदेसको विकास होइ । यि हे प्रदेस नं २ के विकासके जीवन आधार ह । वोकरा वादेमे भौतिक पुर्वाधार सव दुसर प्राथामिकता ह । अगर प्रदेस नं २ के द्रुत विकास करेके वा त कम्तीमे हर वार्ड मे एक एक किसान विद्यालय और सिप विकास केन्द्रके वनावल जरुरी वा । अगर जनताके चेतना स्तरमे वृद्धि होइ तवे आय आर्जन, जनस्वास्थ्य, पोषणके अवस्था, दहेजके अन्त, जातिय विभेदके उन्मुलन लगायतके सव समस्या अवसरमे रुपान्तरण होइ । ये वेला सैद्धान्तीक विचारमे वहस करके समयके वरवाद कहिल जरुरी नैखे । हर घर घरमा उत्साह और उमंग जगाके विकासके कार्यमे सारा ध्यान और श्रोतके प्रयोग कइल जरुरी वा । वहुत शुभकामना ।

डा. राम चन्द्र लामिछाने, २०७४।११।१३

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